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ग्रीन कॉफी के लाभ – Benefits Of Green Coffee

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ग्रीन कॉफी के लाभ – Benefits Of Green Coffee

Benefits Of Green Coffee In Hindi – ग्रीन कॉफी क्या है (Green Coffee In Hindi) बनाने का तरीका (Green Coffee Recipe) लाभ (Green Coffee Benefits) और नुक्सान (Side Effects Of Green Coffee) .

ग्रीन कॉफी में मौजूद क्लोरोजेनिक ऐसिड बॉडी फैट और ब्लड ग्लूकोज को बर्न करने में हमारी काफी मदद करता है। इसके साथ ही ग्रीन कॉफी का सेवन करने से ये हमारे शरीर में गुड कलेस्ट्रॉल के स्तर को भी सुधारता है। यह ऐसिड बेसेल मेटाबॉलिक रेट को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे ब्लड में रिलीज होने वाले ग्लूकोज का स्तर घट जाता है। इसके अलावा, इसके नियमित सेवन से शरीर में कार्बोहाईड्रेट और फैट्स की खपत कम होती है, जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है।

ग्रीन कॉफी बीन्स क्या है – Green Coffee Beans

कॉफी के पौधे से हरे रंग के बीजों को लेकर पहले उन्हें भूना जाता है और फिर पीसकर सामान्य कॉफी बनाई जाती है। इस प्रक्रिया से कॉफी का रंग हरे से बदलकर हल्का या गहरा भूरा हो जाता है और स्वाद भी बढ़ जाता है, लेकिन कॉफी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट जैसे गुणकारी तत्व की मात्रा कम हो जाती है। वहीं, जब कॉफी के बीजों को बिना भुने पीसकर पाउडर बनाया जाता है, तो इसे ग्रीन कॉफी कहते हैं।

ग्रीन कॉफी के लाभ – Benefits Of Green Coffee In Hindi

ग्रीन कॉफी को भूना नहीं जाता, इसलिए यह त्वचा, बालों और स्वास्थ्य के लिए कई प्रकार के लाभ प्रदान करती हैं। ग्रीन कॉफी को अपनी डाइट में शामिल कर आप कम समय में अपना वजन कम कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि ग्रीन कॉफी आपके लिए कितनी फायदेमंद है।

  1. ग्रीन कॉफी बीन्स एंटीऑक्सिडेंट के समृद्ध स्रोत होते हैं जो हमारे शरीर में हानिकारक कणो के प्रभावों को कम कर सकते हैं।
  2. ग्रीन कॉफी में क्लोरोजेनिक एसिड होता है जो metabolic दर को 3% से 11% तक बढ़ा सकता है और तेजी से वजन कम करना सुनिश्चित कर सकता है।
  3. ग्रीन कॉफी unnecessary food cravings को नियंत्रित कर सकती है और हमें overeating से रोक सकती है।
  4. ग्रीन कॉफी high sugar के स्तर को कम करती है और परिणामस्वरूप टाइप 2 मधुमेह को नियंत्रित कर सकती है।
  5. ग्रीन कॉफी एक प्राकृतिक डिटॉक्स है जो लीवर को साफ करता है; यह विषाक्त पदार्थों, खराब कोलेस्ट्रॉल, अनावश्यक फैट आदि से मुक्त करता है।
  6. ग्रीन कॉफी में उच्च मात्रा में volatile materials होते हैं जो स्वस्थ त्वचा को बनाए रख ने में और झुर्रियों को कम करने में आपकी सहायता कर सकते हैं।
  7. ग्रीन कॉफी एंटीऑक्सिडेंट, अगर नियमित रूप से लिया जाए, तो बालों को मजबूत, स्वस्थ और सुंदर बनाने में मदद कर सकता है।
  8. ग्रीन कॉफी में फैटी एसिड और एस्टर होते हैं जो त्वचा को पोषण देते हैं और severe damages को heal कर देते हैं।
  9. नियमित रूप से ग्रीन कॉफी का सेवन करने से हमारे शरीर में ‘खराब कोलेस्ट्रॉल’ का स्तर कम हो सकता है।
  10. प्राकृतिक रूप से सुस्त और मुंहासे वाली त्वचा को ठीक करने के लिए ग्रीन कॉफी एक शानदार तरीका माना जाता है।

ग्रीन कॉफी कैसे बनाएं – Green Coffee Recipe

  • ग्रीन कॉफी बनाने के लिए सबसे पहले ग्रीन कॉफी बीन्स को रातभर के लिए पानी में डालकर रख दें।
  • अगली सुबह बीजों सहित पानी को करीब 15 मिनट तक धीमी आंच पर उबालें। इससे
  • बीजों का हरा रंग पानी में आ जाएगा। अब पानी को उतार लें और छान लें।
  • जब पानी सामान्य हो जाए, तो उसे पिएं।
  • यह सबसे अच्छा ग्रीन कॉफी पीने का तरीका हो सकता है।
  • चाहें तो एक पाउच ग्रीन कॉफी के पाउडर को एक कप गर्म पानी में घोलकर भी ग्रीन कॉफी बना सकते हैं।

ग्रीन कॉफी कब पियें – When To Drink Green Coffee

  • भोजन से एक घंटा पहले या बाद में ग्रीन कॉफी का सेवन करने से भोजन से जो पोषक तत्व हमरे शरीर में जाते है उनकी शक्ति बढाने का काम करती है.
  • कुछ लोग भोजन के बीच में भी ग्रीन कॉफी पीना पसंद करते है. कई लोग जब मन किया तभी उसे पी लेते हैं, जो सही नहीं है।

ग्रीन कॉफी के नुकसान – Green Coffee of Side Effects 

  • ग्रीन काॅफी में कैफीन की मात्रा पाई जाती है और इसका अधिक सेवन अनिद्रा, बेचैनी, पेट खराब, मतली, उल्टी, हृदय व श्वास दर में वृद्धि और अन्य दुष्प्रभावों का कारण बन सकता है।
  • ग्रीन काॅफी बींस में क्लोरोजेनिक एसिड की मात्रा भी पाई जाती है और क्लोरोजेनिक एसिड की उच्च खुराक का सेवन हृदय रोग का कारण बन सकता है।
  • ग्रीन कॉफी में मौजूद कैफीन की मात्रा तनाव, रक्तस्राव विकार, दस्त की समस्या और उच्च रक्तचाप की समस्या को बदतर बना सकता है।
  • ग्रीन कॉफी बींस और अन्य स्रोतों में मौजूद कैफीन कैल्शियम की मात्रा को बढ़ा सकता है, जो कि मूत्र में बह जाता है। इससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं।
  • अनियमित तौर पर इसका सेवन यूरिनरी ट्रैक इंफेक्शन का कारण भी बन सकता है।

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