jiohind.com

भारत-इस्लामी वास्तुकला का अनूठा नमूना अलाई दरवाजा – Alai Darwaza Delhi in Hindi

Alai-Darwaza-image

अलाई दरवाजा – Alai Darwaza Delhi in Hindi

अलाई दरवाजा एक शानदार प्रवेश द्वार है जो कि दिल्ली सल्तनत के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी द्वारा बनवाया गया है, अलाई दरवाजा कुतुब मीनार परिसर में क्वाल्ट-उल-इस्लाम मस्जिद के दक्षिणी हिस्से में मौजूद है। आलई दरवाजा लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर का उपयोग कर बनाया गया है।

तुर्क कारीगरों द्वारा निर्मित अलाई दरवाजा भारत की पहली इमारतों में से एक है, जिसे इस्लामी स्थापत्य शैली का उपयोग करके बनाया गया है। ये अपने समय की सबसे महत्वपूर्ण इमारतों में से एक माना जाता है, अलाई दरवाजा ने क्वाल्ट-उल-इस्लाम मस्जिद के आकर्षण को अपने सुंदर मेहराब और फ्रिंज में जोड़ा जो कमल कलियों के समान था। कुतुब परिसर को सजाने की तलाश में अलाउद्दीन खिलजी द्वारा बनाई गई परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अलाई दरवाजा था।

Alai Darwaza History in Hindi – अलाई दरवाजा का इतिहास

यह साउथ दिल्ली में कुतुबमीनार परिसर के अंदर, स्थित है, जिसमें सफेद संगममर और लाल बलुआ पत्थरों से इस्लामिक वास्तुकला की खूबसूरत और आर्कषक नक्काशी की गई है।

इस भव्य और विशाल अलाई दरवाजा की कारीगरी कुछ इस तरह की गई है कि, इसमें प्रारंभिक तुर्की कला की झलक देखने को मिलती हैं, इसलिए इसे प्रारंभिक तुर्की कला का सर्वश्रेष्ठ और अनूठा नमूना भी कहा जाता है।

कुतबमीनार के परिसर को खूबसूरत रुप देने के अलाउद्धीन खिलजी के प्रोजक्ट में इस ऐतिहासिक अलाई दरवाजा का निर्माण, कुव्वत-उल-इस्लाम-मस्जिद के विस्तार करने का एक अहम हिस्सा था।

इसके साथ ही आपको यह भी बता दें, यह चार विशाल और भव्य प्रवेश द्धारों में से एक था, जिसका निर्माण पूरा किया गया, जबकि बाकी तीन प्रवेश द्धारों का निर्माण पूरा नहीं हो सका, क्योंकि बाकी अन्य तीन गेट के निर्माण से पहले ही खिलजी वंश के शासक अलाउ्दीन खिलजी की साल 1316 AD में मृत्यु हो गई थी।

आपको बता दें कि अलाई दरवाजा, भारत की एक ऐसी पहली इमारत है, जिसके निर्माण में इस्लामिक वास्तुकला का इस्तेमाल किया गया है, इसलिए अलाई दरवाजा को इस्लामिक वास्तुकला का ‘रत्न’ भी कहा जाता है, अलाई दरवाजा में की गई सुंदर इस्लामिक नक्काशी, इस्लामिक वास्तुकला का सर्वश्रेष्ठ और बेजोड़ उदाहरण है।

आपको यह भी बता दें कि दिल्ली में गुलाम वंश ने अपने शासनकाल के दौरान सही इस्लामिक वास्तुकला की शैलियों को नियोजित नहीं किया, इसके साथ ही उन्होंने गलत गुंबदों और गलत मेहराबों का इस्तेमाल किया था।

इसी वजह से अलाई दरवाजा भारत में पहले सही इस्लामिक गुंबदों और सही मेहराबों का श्रेष्ठ उदाहरण है।

आपको बता दें कि अलाई दरवाजा की इमारत दिल्ली सल्लतनत के समय में बनी सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारतों में से एक माना जाता है।

Alai Darwaza Architecture – अलाई दरवाजा संरचना

ऐतिहासिक अलाई दरवाजा के नुकीले वृत्ताकार और फैले हुए झब्बेदार किनारों को कमल की कलियों के रुप में जाना जाता है, जो कि इसे कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद से जोड़ता है, जिसमें यह एक प्रवेश द्धार की तरह इस्तेमाल किया जाता है।

अलाई दरवाजा की प्रमुख संरचना के अंदर एक सिंगल हॉल है, जिसकी अंदर से लंबाई करीब 35 फीट और चौड़ाई 56.5 फीट है। वहीं इसकी गुबंददार छत की ऊंचाई करीब 47 फीट है।

पूर्व, पश्चिम और दक्षिण दिशा की तरफ तीनों दरवाजे के नुकीले मेहराब हैं,जो कि घोड़े की नाल के आकार में हैं, जबकि उत्तर दिशा की तरफ जो प्रवेश द्धार है, देशी स्वरुप का है, वहीं इसका मेहराब अर्ध- गोलाकार है। अलाई दरवाजा की पूरी संरचना देखने में काफी आर्कषक लगती है।

अलाई दरवाजा में एक गुंबद भी शामिल हैं, गुंबद का निर्माण पूरी तरह से वैज्ञानिक सिद्धान्तों पर किया गया है। जटिल ज्यामितीय गणनाओं (complex geometric calculations) के आधार पर गुंबद को बेहद संदुर ढंग से बनाया गया है।

यह गुंबद अष्टकोणीय आधार पर बना हुआ है। गुंबद के बाहरी हिस्से पर प्लास्टर सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, ताकि इसे संरक्षित रखा जा सके और इसे एक समान रुप दिया जा सके।

गुंबद के बारे में ध्यान देने वाली बात यह है कि, इस गुंबद को बनाने में सुल्तान इल्तुतमिश की कब्र से पहले के सारे प्रयास असफल रहे थे। इस संबंध में अलाई दरवाजा का गुंबद एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।

अलाई दरवाजे के चारों तरफ सफेद संगममर और लाल बलुआ पत्थर से खूबसूरत नक्काशी की गई है, जिसे देखते ही बनता है।

इसके साथ ही प्रवेश द्धार के दोनों तरफ लगी सुंदर ढंग से तराशी गईं जालीदार खिड़कियां भी बनी हुई हैं, और तो और इस आर्कषक अलाई दरवाजे की सतह (surface) की सजावट भी काफी सुंदर और आर्कषक है।

इस ऐतिहासिक दरवाजे की सतह की कलमकारी और डिजाइन दोनो एक दूसरे की पूरक हैं, जो कि देखते ही बनती है। यह दरवाजे को बाएं और दाएं दोनों तरफ से लगभग एक समान दिखाई देते हैं।
इस ऐतिहासिक इमारत के सभी प्रवेश द्धारों को शानदार ढंग से डिजाइन किया गया है। इस गेट के चारों मेहराब अर्ध-गोलाकार हैं।

वहीं गेट के मध्य में एक बिंदु भी बना हुआ है, हालांकि, इस गेट की समरुपता लगभग बाकी गेट की तरह ही है।

अलाई दरवाजा का संपूर्ण आकार काफी आर्कषक और प्रभावशाली दिखता है। जिसकी ऊंचाई 14 मीटर से ज्यादा है। गेट की लंबाई 17 मीटर और चौड़ाई करीब 10 मीटर है। वहीं गेट करीब 3 मीटर मोटा है।

इस तरह खिलजी वंश के शासक अलाउद्धीन खिलजी द्धारा इस गेट का निर्माण बेहद मजबूती के साथ कराया गया था, इसलिए इसे बनाने में काफी वक्त भी लगा था।

दिल्ली में बना हुआ यह भव्य और ऐतिहासिक अलाई दरवाजा काफी शानदार है, इसकी सुंदर नक्काशी को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।

अलाई दरवाजा एक ऐसा गेट है जो कि न सिर्फ विशाल और भव्य है, बल्कि, यह इस्लामिक वास्तुकला का अनूठा नमूना भी है।

How to Reach Alai Darwaza – अलाई दरवाजा तक कैसे पहुंचे 

अलाई दरवाजा देखने के इच्छुक यात्रियों को पहले दिल्ली के कुतुब मीनार के परिसर तक पहुंचना होगा। वे कुतुबमीनार परिसर तक दिल्ली के अंदर चलने वाली लोकल बस के माध्यम से या फिर ऑटो -रिक्शा और टैक्सी किराए पर लेकर यहां पहुंच सकते हैं। यहां तक पहुंचने के लिए मेट्रो का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

Alai Darwaza Timings

सुबह 6 बजे से शाम 6.30 तक खुला रहता है

Alai Darwaza  Entry Fees – प्रवेश शुल्क

भारतीयों के लिए प्रवेश शुल्क: 10 रुपये

विदेशियो के लिए प्रवेश शुल्क: 250 रुपये

15 वर्ष तक के बच्चों के लिए मुफ्त प्रवेश

Best Time to Visit Alai Darwaza – कब जायें अलाई दरवाजा देखने

अलाई दरवाजा के कुतुब मीनार में स्थित है अगर आप यह घुमने की जाने की सोच रहें हैं तो गर्मीयों में बिल्कुल भी ना जायें क्योंकी दिल्ली में गर्मी बहुत पड़ती है गर्मीयो में घुमने से आपकी त्वचा को नुकसान पहुँच सकता है यहाँ घुमने का सबसे अच्छा टाईम फरवरी, मार्च और अक्टुबर, नवम्बर, दिसम्बर है

Add comment

Must Get It ..