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माउंट आबू घूमने की जगह – Best Places To Visit In Mount Abu In Hindi

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 Mount Abu –  माउंट आबू राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन जो अपने शांत वातावरण और हरे-भरे माहोल की वजह से इस राज्य का सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। माउंट आबू पर्यटन स्थल अरावली रेंज में एक उच्च पथरीले पठार पर स्थित है जो जंगल से घिरा हुआ है। इस जगह की शांत जलवायु और नीचे के मैदानों का दृश्य पर्यटकों को काफी उत्साहित करता है। माउंट आबू की निकी झील नौका विहार के लिए एक बहुत फेमस जगह मानी जाती है। इस जगह पर दिलवाड़ा मंदिर, हनीमून प्वाइंट, सनसेट पॉइंट जैसे कई लोकप्रिय पर्यटक स्थल हैं। माउंट आबू हरे भरे जंगलो से घिरा हुआ है जो एक रोमेंटिक और साधारण दोनों तरह के पर्यटकों के लिए काफी अच्छा है।

माउंट आबू का इतिहास  –  History Of Mount Abu 

Post Index

माउंट आबू एक लोकप्रिय जैन तीर्थ स्थल और राजस्थान में एकमात्र प्राचीन हिल स्टेशन है। पौराणिक कथाओं की माने तो पवित्र पर्वत पर हिन्दू धर्म के तैंतीस करोड़ देवी देवता भ्रमण करते हैं। माना जाता है  कि एक बार जब महान संत वशिष्ठ ने पृथ्वी से असुरों के विनाश के लिए यहाँ पर एक यज्ञ का आयोजन किया था तो जैन धर्म के चौबीसवें र्तीथकर भगवान महावीर भी यहां आये थे। इसके बाद से ही यह जगह जैन भक्तों के लिए लिए एक पवित्र और धार्मिक जगह बन गई थी।

यह भी कहा जाता है कि इस जगह का नाम आबू नाम हिमालय के पुत्र आरबुआदा के नाम पर पड़ा है। आरबुआदा एक बहुत ही शक्तिशाली सर्प था, जिसने भगवान शिव के बैल नंदी की खाई में गिरने से जान बचाई थी। बाद में यह स्थान ‘माउंट आबू’ के रूप में विकसित हुआ, जो धार्मिक भक्ति का निवास बन गया। लोक कथाओं में यह बताया गया है कि इस निर्मल पर्वत पर कई हिंदू देवी-देवता अक्सर आया करते थे। गोमुख, ऋषि वशिष्ठ ने भी यहां पर निवास किया है।

आज इतने समय के बाद भी माउंट आबू एक पर्यटन जगह होने के साथ एक धार्मिक स्थल भी है। माउंट आबू  के इतिहास के बारे में कमी की वजह से इसके इतिहास और विकास के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिलती है। इस जगह के बारे में कहा जाता है कि कठिन भूभाग और घने जंगल होने की वजह से इस जगह पर कभी आक्रमण नहीं किया गया और न ही किसी विदेशी शासक ने यहाँ पर हमला किया।

कुछ ऐतिहासिक जानकारी से यह पता चलता है कि यह क्षेत्र नगाओं, भीलों, सोलंकियों और देवड़ा-चौहान के शासन का हिस्सा था। लेकिन यहाँ के सर्वश्रेष्ठ दिलवाड़ा मंदिर का निर्माण सोलंकियों के शासन में हुआ था। इस जगह को गौरव केवल ‘गुर्जर’ के शासन प्राप्त हुआ था। जिसके बाद इस स्थान को गुर्जरभूमि’ के रूप में जाना-जाने लगा था। अकबर के मुगल शासन के समय इस जगह की महिमा और महत्व जाने लगा था। लेकिन ब्रिटिश राज के उदय के साथ इस जगह ने अपना महत्व वापस पा लिया। उस समय माउंट आबू को राजस्थान की ग्रीष्मकालीन राजधानी का शीर्षक भी मिला था। आज माउंट आबू दुनिया भर में एक आकर्षक पर्यटक स्थल के रूप में प्रसिद्ध है।

माउंट आबू के दर्शनीय स्थल  –   Best Places To Visit In Mount Abu 

 दिलवाड़ा जैन मंदिर माउंट आबू  – Dilwara Jain Temple Mount Abu

दिलवाड़ा जैन मंदिर राजस्थान की अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित जैनियों का सबसे लोकप्रिय और सुंदर तीर्थ स्थल है। इस मंदिर का निर्माण 11 वीं और 13 वीं शताब्दी के बीच वास्तुपाल और तेजपाल ने किया था। दिलवाड़ा मंदिर अपनी जटिल नक्काशी और हर से संगमरमर की संरचना होने की वजह से प्रसिद्ध है। यह मंदिर बाहर से बहुत ही साधारण दिखाई देता है लेकिन जब आप इस मंदिर को अंदर से देखेंगे तो इसकी छत, दीवारों, मेहराबों और स्तंभों पर बनी हुई डिजाइनों को देखते ही आकर्षित हो जायेंगे। जैनियों का तीर्थ स्थल होने के साथ ही यह मंदिर एक संगमरमर से बनी एक ऐसी जादुई संरचना है, जो हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है।

 माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य – Mount Abu Wildlife Sanctuary 

माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य एक समृद्ध जैव विविधता वाली ऐसी जगह है जो इसे एक छोटे और अच्छे पर्यटक स्थलों की सूची में शामिल करता है। यह अभयारण्य माउंट आबू पर्वत श्रृंखलाओं की सबसे पुरानी जगहों में से एक है और यहां के कई उत्तम दृश्यों के साथ आपको कई दर्शनीय स्थल भी देखने को मिलते हैं। इस पूरे क्षेत्र को वनस्पतियों और जीवों को संरक्षित करने के लिए एक वन्यजीव अभयारण्य बनाया गया था। यह अभयारण्य एक ऐसी जगह है, जिसमे सदाबहार जंगलों की जीवंत वनस्पति पाई जाती है। अगर आप राजस्थान की यात्रा के समय कुछ अच्छे वन्यजीवों को देखना और प्राकृतिक जगह का अनुभव लेना चाहते हैं तो यह इसके लिए बहुत अच्छा स्थान है।

नक्की झील माउंट आबू –  Nakki Lake Mount Abu

माउंट आबू में अरावली पर्वतमाला में स्थित एक नक्की लेक है जिसे स्थानीय रूप से नक्की झील के नाम से भी जाना जाता है। यह झील प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग के सामान मानी जाती है क्योंकि अद्भुत प्राकृतिक द्रश्यों से भरी हुई यह झील वास्तव में माउंट आबू का सबसे प्रमुख आकर्षण है। नक्की लेक भारत की पहली मानव निर्मित झील है जिसकी गहराई लगभग 11,000 मीटर और चौड़ाई एक मील है। माउंट आबू के केंद्र में स्थित यह आकर्षक झील हरे भरे पहाड़ों, पहाड़ों और अजीब आकार की चट्टानों से घिरी हुई है। माउंट आबू की उड़ने वाली हवाएं और सुखदायक तापमान में बोटिंग  करना आपके दिल को खुश कर देगी। बताया जाता है कि नक्की झील में, महात्मा गांधी की राख को 12 फरवरी 1948 को विसर्जित कर दिया गया था और गांधी घाट का निर्माण किया गया था। यह झील प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए एक बेहद लोकप्रिय जगह है।

गुरु शिखर – Guru Shikhar

अगर आप शहर के तेज और व्यस्त जीवन बोर हो गए है तो गुरु शिखर आपके लिए सबसे अच्छी जगह है। गुरु शिखर अरावली रेंज की सबसे ऊँची चोटी है जो माउंट आबू से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस शिखर की समुद्र तल से ऊँचाई 1722 मीटर है जिसकी वजह से यहाँ से अरावली रेंज और माउंट आबू के हिल स्टेशन का बहुत ही आकर्षक दृश्य देखने को मिलता है। इस जगह पर आबूवेधशाला और गुरु दत्तात्रेय का गुफा मंदिर जो भगवान विष्णु को समर्पित है। ऑब्जर्वेटरी में 1.2 मीटर का इंफ्रारेड टेलीस्कोप है। 15 किलोमीटर की ड्राइव के बाद आपको गुरु शिखर पर जाने के लिए कुछ सीढ़ियां चढ़नी होंगी। अगर आप अक्टूबर और नवंबर के समय इस जगह पर जाते हैं तो यहाँ पर बहुत अधिक बादल और धुंध हो जाती है। यहां आने वाले पर्यटकों को इस समय ऐसा महसूस होता है जैसे वो बादलों की मदद से गुरु शिखर पर जा रहे हैं क्योंकि चारों ओर धुंध दिखाई देती है। यह जगह यहां आने वाले पर्यटकों के मन को आनंदित कर देती है।

 अर्बुदा देवी मंदिर हिल पर्यटन माउंट आबू  – Arbuda Devi Temple, Mount Abu 

अर्बुदा देवी मंदिर को माउंट आबूका सबसे पवित्र तीर्थ बिंदु माना जाता है। इस मंदिर को 51 में से छठा शक्तिपीठ माना जाता है। अर्बुदा देवी को कात्यायनी देवी का अवतार कहा जाता है। नवरात्र के मौके पर माउंट आबू का पर्यटन स्थान एक आध्यात्मिक नगरी के रूप में बदल जाता है। यहाँ पर दूर से लोग अर्बुदा देवी मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं। आपको बता दें कि यह मंदिर एक गुफा के अंदर स्थित है जिसके दर्शन के लिए आपको 365 सीढ़ियां चढ़कर जाना होता है। बताया जाता है कि मंदिर के पास दूध के रंग के पानी से बना पवित्र कुआँ है। यहाँ के स्थाई निवासी इस कुएं को कामधेनु (पवित्र गाय) के रूप में मानते हैं। यह पवित्र कुआँ मंदिर के लिए पानी का मुख्य स्रोत भी है। विशाल ठोस चट्टानों से निर्मित यह मंदिर भारत के चट्टानों पर बने मंदिरों के सर्वश्रेष्ठ नमूनों में से एक है।

 ट्रेवर टैंक माउंट आबू  –  Trevors Tank Mount Abu

माउंट आबू से 5 किमी दूर स्थित ट्रेवर्स टैंक प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बेहद लोकप्रिय जगह है। इसका नाम एक ट्रेवर नामक एक इंजीनियर के नाम पर रखा गया है जिसने इसे डिजाइन किया था। मगरमच्छ, पक्षी और अन्य वन्यजीवों को देखने के लिए लोकप्रिय एकांत जंगल में जलाशय बना हुआ है। वर्तमान में यह स्थानीय और यहां हर साल आने वाले पर्यटकों दोनों के लिए एक लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट है। यह जगह आपको प्रकृति का शानदार नजारा दिखाती है।

 टॉड रॉक माउंट आबू – Toad Rock Mount Abu

टॉड रॉक को माउंट आबू के शुभंकर के रूप में जाना जाता है, यह चट्टानों से बनी एक बहुत ही अद्भुद जगह है जहां पर आपको बड़ी-बड़ी चट्टानें देखने को मिलेंगी। टॉड रॉक माउंट आबू आने वाले सभी पर्यटकों के द्वारा में सबसे ज्यादा बार देखी जाने वाली जगह है। आसपास की झील और हरे भरे पहाड़ी क्षेत्रों केआकर्षक दृश्यों को देखने के लिए आप यहाँ चट्टान पर चढ़ सकते हैं और अपने कैमरा की मदद से कुछ लुहावने दृश्यों को कैद कर सकते हैं।

श्री रघुनाथ मंदिर माउंट आबू  –  Shri Raghunath Temple Mount Abu

भगवान विष्णु के पुनर्जन्म को समर्पित श्री रघुनाथ जी मंदिर निकी झील के तट पर एक 650 साल पुराना मंदिर। जो मुख्य रूप से वैष्णवों द्वारा देखा गया ऐसा मंदिर है जिसे पृथ्वी पर सबसे पवित्र मंदिरों में से एक माना जाता है। श्री रघुनाथ जी के बारे में  माना जाता है कि वे अपने अनुयायियों को सभी प्राकृतिक आपदाओं से बचाते हैं। इसके साथ ही उनके भक्तों का यह भी मानना है कि वे उन्हें जीवन के दर्द और सभी समस्याओं से मुक्त करेंगे। इस मंदिर की दीवारों पर मेवाड़ की स्थापत्य विरासत को शिलालेखों की मदद से देखा जा सकता हैं। इस मंदिर में नाजुक पेंटिंग और नक्काशी भी देखने को मिलती है। श्री रघुनाथ जी की उत्कृष्ट नक्काशीदार मूर्ति माउंट आबू का सबसे मुख्य आकर्षण है।

गौमुख मंदिर माउंट आबू  – Gaumukh Temple Mount Abu 

माउंट आबू में शहर से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित गौमुख मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर है। इस मंदिर के दर्शन करने के लिए आपको 700 सीढ़ियों की पवित्र चढ़ाई करके जाना होता है। यह मंदिर अपने आस-पास की घाटी का मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है। गौमुख मंदिर में पूरे साल पर्यटकों और भक्तों की भीड़ होती है। घने जंगल के बीच स्थित इस मंदिर में गौमुख (गाय काप्मुख) भगवान कृष्ण, भगवान राम और ऋषि वशिष्ठ की मूर्तियों के साथ नंदी की मूर्ति आपका स्वागत करता है। इस मंदिर में संगमरमर के बैल की मूर्ति (मुंह से पानी गिरने वाली) हिंदू पौराणिक कथाओं में भगवान शिव के बैल नंदी को समर्पित है। यहाँ आकर आप प्रकृति की सुंदरता देखने के साथ ट्रेकिंग का भी भरपूर आनंद ले सकते हैं। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह मंदिर संत वशिष्ठ के समर्पण में बनाया गया था जिन्होंने चार प्रमुख राजपूत वंशों के निर्माण के लिए एक यज्ञ किया था। जिस अग्नि कुंड में यज्ञ किया गया था वो इस मंदिर के मुख्य आकर्षणों में से एक है। रामायण की कथा से यह ज्ञात हुआ है कि राम वनवास के समय राम और लक्ष्मण ज्ञान की प्राप्ति के लिए इस जगह पर आये थे और उन्होंने यहां रहने वाले ऋषि वशिष्ठ से आशीर्वाद लिया था

यूनिवर्सल पीस हॉल माउंट आबू  –  Universal Peace Hall Mount Abu

यूनिवर्सल शांति हॉल जो कि ब्रह्म कुमारी आध्यात्मिक विश्वविद्यालय का मुख्य सभा हॉल है जिसको ओम शांति भवन भी कहा जाता है। इस भवन का निर्माण 1983 में किया गया था। शांति से भरपूर सफेद संरचना के इस हाल में लगभग 5,000 लोग बैठ सकते हैं। इस हाल में किसी भी आयोजन के दौरान 16 बिभिन्न भाषाओं में अनुवाद की सुविधा है। जब से इस हाल को सार्वजनिक पर्यटन स्थल घोषित किया गया है तब से करीब 8,000 से अधिक लोग रोज यहां आते हैं। जब आप यूनिवर्सल पीस हॉल में आते हैं तो यहाँ पर ब्रह्मा कुमारियों का एक सदस्य आपको एक परस्पर संवादात्मक समूह में ले जायेगा जहां किसी भी इंसान की रोज की परेशानी और तनाव को दूर किया जाता है।

सूर्यास्त बिंदु माउंट आबू  –  Sunset Point, Mount Abu

अगर आप माउंट आबू घूमने के लिए आ रहे हैं तो आपकी यात्रा यहां के सन सेट पॉइंट पर्यटन के खास स्थल के बिना पूरी नहीं होगी। इस जगह पर आपको ऐसा नजारा देखने को मिलता है जो अपने कभी सोचा नहीं होगा। सूर्यास्त के समय बीहड़ अरावली पर्वतमाला के बाहर सूर्य की किरणों दृश्य पर्यटकों को बेहद आकर्षित करता है। इस जगह पूरे साल एक सुखद जलवायु होती है। यह जगह किसी भी प्रकृति प्रेमी के लिए बेहद खास है क्योंकि जब सूर्य डूबता है तो इसकी किरणे लाल और नारंगी रंग के रंगों में अरावली की समृद्ध हरियाली में बहुत खूबसूरत दिखाई देती हैं। जो भी पर्यटक शहर के भीड़-भाड़ वाले माहोल से दूर रह कर शांति से सूर्यास्त का आनंद लेना चाहते हैं, उनके लिए माउंट आबू की यह जगह बहुत अच्छी है

माउंट आबू घूमने का सबसे अच्छा समय क्या है  –  Best Time To Visit Mount Abu 

माउंट आबू में वैसे तो साल भर अच्छी जलवायु होती है, क्योंकि यह जगह समृद्ध वनस्पतियों से घिरी हुई है, जिसमें फूलों के झाड़ियाँ और शंकुधारी वृक्ष भी हैं। अगर आप माउंट आबू में घूमने के बारे में सोच रहे हैं तो बता दें कि इस जगह की यात्रा करने का सबसे अच्छा समय मानसून और सर्दियों के दौरान है। इसका मतलब यह है आप जुलाई से – फरवरी तक कभी भी माउंट आबू की सैर कर सकते हैं। इन महीनों का सुंदर मौसम और सुखद तापमान इस जगह की यात्रा के लिए उत्कृष्ट है।

माउंट आबू की संस्कृति  – Mount Abu Culture

पर्वतों के दरमियान स्थित होने की वजह से यहाँ पर कुछ पहाड़ी संस्कृति की झलकियाँ हैं, तो धार्मिक स्थलों की बहुल्यता की वजह से ये स्थान आध्यात्मिक भी हो जाता है. यहाँ पर ग्रीष्म त्यौहार “समर फेस्टिवल” मनाया जाता है. यहाँ के लोकनृत्यों में बलाड, घूमर, धाप आदि मशहूर हैं, जो ख़ुद में राजस्थानी संस्कृति समाय हुए है

 माउंट आबू कैसे पहुंचे – How To Reach Mount Abu 

  • एयर द्वारा  माउन्ट आबू हवाई जहाज की सहायता से जाया जा सकता है. माउन्ट आबू का सबसे क़रीबी हवाई अड्डा है डबोक. डबोक उदयपुर में स्थित है जहाँ से माउंट आबू की दूरी 185 किलोमीटर की है. यहाँ के लिए जेट ऐर्वार्य्स, इंडियन एयरलाइन्स, स्पाइस जेट, इंडिगो आदि फ्लाइट्स मिल जाते हैं.
  • बस द्वारा  – माउंट आबू राजस्थान में स्थित है. यहाँ पर देश के कई बड़े शहरों से कई लम्बी सड़के पहुँचती हैं. दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड आदि जगहों से माउंट आबू बस स्टॉपेज के लिए कई बसें खुलती हैं.
  • ट्रेन द्वारा  –  माउंट आबू का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन आबू रोड है. बैंगलोर, दिल्ली, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद, अजमेर, बांद्रा, बरेली, भुज, बीकानेर, दादर, चेन्नई, देहरादून, जोधपुर, मुजफ्फरपुर, मैसूर आदि कई जगहों से ट्रेन आबू रोड रेलवे स्टेशन तक आती है. आबू रोड से माउंट आबू की दूरी लगभग 40 किलोमीटर की है जिसे लगभग एक घंटे में तय किया जा सकता है.

 

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