Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!
jiohind.com

मिलिए मेरी वाली चाय (Chaayos) के Co-Founder नितिन सलूजा से

niteen-saluja biography

भारत में, चाय सिर्फ एक कप चाय तक ही सिमित नहीं है। यह कुछ ऐसा है जिससे लोग अपने दिन की शुरुआत करते हैं। सुबह उठने के लिए, स्ट्रेस को दूर करने के लिए, फ्रेश फील करने के लिए एक आवश्यक पेय है। हमारे बुज़ुर्ग कहते थे कि एक कप चाय किसी भी मसले को सुलझा सकती है और यकीन मानिये कई सारी मीटिंग्स या डील्स तो बस एक कप चाय में ही फाइनल हो जाती है। चाय हमारे देश में इतनी इम्पोर्टेन्ट है कि, हर घर में, चाहे कोई भी स्थिति हो, लोग चाय जरूर पीते हैं।

जब, मेरी वाली चाय के शौक़ीन Chaayos के सह-संस्थापक नितिन सलूजा अमेरिका में एक रात डिनर के बाद एक कप चाय पीने कि इच्छा से निकले, तो वे ऐसी कोई भी जगह नहीं ढूंढ पाए जहा उन्हें अपनी पसंद कि चाय मिल सके। और इसी इंसिडेंट के बाद उनके मन में एक विचार आया।

दो साल बाद 2010 में, अमेरिका में अपनी ठीक-ठाक नौकरी छोड़ने के बाद, नितिन वापस भारत आया और अपने दोस्त राघव वर्मा को संपर्क किया, जो ओपेरा कंपनी में काम करता था और नितिन का पूर्व सहयोगी था। IITians ने डिस्कस किया – चाय इतना महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध पेय होने के बाद, हमने कभी भी किसी प्रसिद्ध रेस्टोरेंट चेन आउटलेट के बारे में नहीं सुना जो केवल चाय के लिए हो। किसी भी शहर में 2000 से अधिक कॉफी चेन उपलब्ध हैं, लेकिन एक कैफे कि चाय में वो स्वाद नहीं आता। लोगों को अपनी पसंद की एक कप चाय पाने के लिए अपने घर या किसी सड़क किनारे की दुकान पर निर्भर रहना पड़ता है। बस उन्ही चाय प्रेमियों के लिए चैयोस की नींव राखी गयी।

अगले दो वर्षों के लिए, नितिन और राघव ने पुरे मार्केट कि research कि, और परिणामस्वरुप उन्हें अच्छी खबर मिली।भारत चाय पीने वालों का देश है, जहां एक कप कॉफी कि तुलना में 30 कप चाय बेची जाती है, और फिर नवंबर 2012 में साइबर सिटी, गुड़गांव में पहला चायोस आउटलेट आया, जो चाय प्रेमियों के लिए एक अच्छी खबर थी । भारत में कोई एक सही चाय नहीं पीता है और इसी तरह ‘मेरी वाली चाय’ ने Chaayos मेनू पर अपनी पहली उपस्थिति बनाई।

सीईओ और चायोस के संस्थापक नितिन सलूजा कहते हैं-

“यह चायोस शुरू करने का मुख्य विचार था – एक ऐसी जगह हो जहाँ आप अपनी पसंद से बनाई गई ताज़ी स्वच्छ चाय की चुस्की लेते हुए कुछ पल आराम से बितायें।”

उन्होंने 12,000 अलग-अलग तरीकें पेश करके customization को एक नयी ऊंचाई दी, कि कैसे आप अपने चाय के कप का आनंद ले सकते हैं। कस्टमर्स के ढेर सरे कॉम्प्लिमेंट्स ने उनके कॉन्फिडेंस को और बढ़ाया।

2018 तक, दोनों गुड़गांव, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, चंडीगढ़, मुंबई और ठाणे में 52 चाय कैफे शुरू करने में कामयाब रहे। तब से, उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा, और ब्रांड ने कई सफलताएं हासिल कि। हालाँकि,कई लोग ने उन्हें नीचा दिखने में या उनकी इंसल्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लोगो ने तो ये भी कहा – ये बहुत ही बुरा idea था,आप कभी भी कॉफ़ी कि बराबरी नहीं कर पाएंगे।

लेकिन लोगों को ये सोच बदलनी पड़ी जब एक ही कस्टमर दिन में तीन बार चाय कि चुस्की लेने आने लगा। यह उनकी USP बन गई- “मेरी वाली चाय ” लोगप्रिय होगयी। महीने-दर-महीने 42% ग्राहक बढ़ते रहे और ये आंकड़ा साल-दर-सालबढ़ता ही गया, जिससे आज वे पुरे देश में लोकप्रियता हासिल कर चुके हैं।

फिर भी, वे अपने शुरुआती दिनों को नहीं भुले। उन्हें इस मुकाम तक पहुँचने के लिए कई व्यक्तिगत चुनौतियों को पार किया है। उनका परिवार हैरान था कि IIT graduate बेटे अपनी अछि खासी नौकरी छोड़ कर चाय बचने निकलें है, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को नहीं छोड़ा, और जैसा कि हम सभी अब जानते हैं, उनके बिज़नेस ने सफलता कि ऊंचाइयों को छुआ है।

ये आप सभी के लिए, जो अपने सपने को एक मौका देना चाहते हैं, यह नितिन का कहना है। “संकल्प और दृढ़ता क साथ आप सब कुछ पा सकते है” कोई फर्क नहीं पड़ता कि जीवन में आपके रास्ते में कितनी परेशानियां आती है। राघव का कहना है, कि “quality associations are key” और यही एक संगठन को सफलता कि ऊंचाइयों कि ओर ले जाता है।

Add comment

Must Get It ..