Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!
jiohind.com

चित्तौड़गढ़ किला का इतिहास – Chittorgarh Fort Complete Guide

chittorgarh-fort

चित्तौड़गढ़ किला – Chittorgarh Fort 

Chittorgarh Kila – चित्तौड़गढ़ किला (चित्तोर दुर्ग) भारत के विशालतम किलो में से एक है। यह एक वर्ल्ड हेरिटेज साईट भी है। यह किला विशेषतः चित्तोड़, Chittod Ka Kila मेवाड़ की राजधानी के नाम से जाना जाता है। पहले इसपर गुहिलोट का शासन था और बाद में सिसोदिया का शासनकाल था।

चित्तौड़ी राजपूत के सूर्यवंशी वंश ने 7 वी शताब्दी से 1568 तक परित्याग करने तक शासन किया और 1567 में अकबर ने इस किले की घेराबंदी की थी। यह किला 180 मीटर पहाड़ी की उचाई पर बना हुआ है और 691.9 एकर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस किले से जुडी बहुत सी इतिहासिक घटनाये है। आज यह स्मारक पर्यटको के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

चित्तौड़गढ़ किला वीरता की मिसाल – Chittorgarh Kila the symbol of Rajput chivalry

15 से 16 वी शताब्दी के बाद किले को तीन बार लुटा गया था। 1303 में अल्लाउद्दीन खिलजी ने राना रतन सिंह को पराजित किया था। 1535 में गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने बिक्रमजीत सिंह को पराजित किया था और 1567 में अकबर ने महाराणा उड़ाई सिंह द्वितीय को पराजित किया था।

जिन्होंने इस किले को छोड़कर उदयपुर की स्थापना की थी। लेकिन तीनो समय राजपूत सैनिको ने जी-जान से लढाई की थी। उन्होंने महल को एवं राज्य को बचाने की हर संभव कोशिश की थी लेकिन हर बार उन्हें हार का ही सामना करना पड़ रहा था।

चित्तोड़गढ़ किले के युद्ध में सैनिको के पराजित होने के बाद राजपूत सैनिको की तकरीबन 16,000 से भी ज्यादा महिलाओ और बच्चो ने जौहर करा लिया था। और अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था।

सबसे पहले जौहर राना रतन सिंह की पत्नी रानी पद्मिनी ने किया था। उनके पति 1303 के युद्ध में मारे गये थे और बाद में 1537 में रानी कर्णावती ने भी जौहर किया था। इसीलिये यह किला राष्ट्रप्रेम, हिम्मत, मध्यकालीन वीरता और 7 और 16 वी शताब्दी में मेवाड़ के सिसोदिया और उनकी महिलाओ और बच्चो का राज्य के प्रति बलिदान देने का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है।

उस समय राजपूत शासक, सैनिक, महिलाये और स्थानिक लोग मुग़ल सेना को सरेंडर करने की बजाये लढते-लढते प्राणों की आहुति देना ठीक समझते थे। 2013 में कोलंबिया के फ्नोम पेन्ह (Phonm Penh) में वर्ल्ड हेरिटेज कमिटी के 37 वे सेशन में चित्तोड़गढ़ किले के साथ ही राजस्थान के पाँच और किलो को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साईट में शामिल किया गया था।

राजस्थान का ऐसा दुर्ग जहां चढऩे में हाथियों के भी आते थे पसीने, आज सीना तान शौर्य की गाथा गाता है ये किला

Chittorgarh Fort History – चित्तोड़गढ़ किले का इतिहास 

चित्तोड़गढ़ किले – Chittorgarh Fort का निर्माण 7 वी शताब्दी में मौर्य के शासन काल में किया गया था और इसका नाम भी मौर्य शासक चित्रांगदा मोरी के बाद ही रखा गया था।

इतिहासिक दस्तावेजो के अनुसार चित्तौड़गढ़ किला 834 सालो तक मेवाड़ की राजधानी रह चूका था। इसकी स्थापना 734 AD में मेवाड़ के सिसोदिया वंश के शासक बाप्पा रावल ने की थी।

ऐसा कहा जाता है की इस किले को 8 वी शताब्दी में सोलंकी रानी ने दहेज़ के रूप में बाप्पा रावल को दिया था। 1568 AD में इस किले को अकबर के शासनकाल में इस किले को लूटकर इसका विनाश भी किया गया था लेकिन फिर बाद में लम्बे समय के बाद 1905 AD में इसकी मरम्मत की गयी थी। इस किले का नियंत्रण पाने के लिये तीन महत्वपूर्ण लढाईयाँ हुई थी।

1303 में अल्लाउद्दीन खिलजी ने किले को घेर लिया था। 1534 में गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह ने किले को घेर लिया था और 1567 में मुग़ल बादशाह अकबर ने किले पर आक्रमण किया था। घेराबंदी के काल को यदि छोड़ दिया जाए तो यह किला हमेशा गुहिलोट के राजपूत वंश के सिसोदिया के नियंत्रण में ही था।

उन्होंने इसे बाप्पा रावल से अवतरित किया था। इस किले की स्थापना को लेकर कई प्राचीन कहानियाँ भी है और हर घेराबंदी के बाद इसके पुनर्निर्माण की भी बहोत सी कहानियाँ है।

चित्तौड़ का महाभारत में भी उल्लेख किया गया है। कहा जाता है की पांडव के भाई भीम अपने विशाल ताकत के लिये जाने जाते थे। इसीके चलते एक बार उन्होंने पानी पर भी अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया था जिससे एक कुंड का निर्माण हुआ था और उस कुंड को भीमलत कुंड के नाम से जाना जाता है।

लेकिन बाद में इसका नाम बदलकर भीमा रखा गया था। प्राचीन गाथाओ के अनुसार इस किले का निर्माणकार्य भीम ने ही शुरू किया था।

How to Reach Chittorgarh – चित्तौड़गढ़ कैसे पहुंचे 

चित्तौड़गढ़ पहुँचने के लिए कई रास्ते हैं। पर्यटक अपनी पसंद और बजट के अनुसार कोई भी रास्ता चुन सकते हैं। आइए एक नजर डालते हैं चित्तौड़गढ़ पहुंचने के विभिन्न तरीकों पर।

चित्तौड़गढ़ हवाई जहाज से – Chittorgarh Airport

चित्तौड़गढ़ का निकटतम हवाई अड्डा डबोक हवाई अड्डा है। इसे महाराणा प्रताप हवाई अड्डे के रूप में भी जाना जाता है। चित्तौड़गढ़ से 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित, यह हवाई अड्डा चित्तौड़गढ़ को अन्य स्थानों से हवाई मार्ग से जोड़ने का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। हवाई यात्रा करके, आप बहुत समय बचा पाएंगे और चित्तौड़गढ़ में अपनी अधिकांश छुट्टी बना पाएंगे।

रेल द्वारा चित्तौड़गढ़ 

चित्तौड़गढ़ भी रेल द्वारा अन्य स्थानों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन गम्भीरी नदी के तट पर स्थित है। स्टेशन पर्यटकों के लिए बहुत उपयोगी है क्योंकि यह कोटा, उदयपुर, जयपुर, अजमेर और दिल्ली जैसे विभिन्न शहरों से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, यदि आप ट्रेन से यात्रा कर रहे हैं, तो आप पैलेस ऑन व्हील्स का भी विकल्प चुन सकते हैं, जो चित्तौड़गढ़ स्टेशन को छूती है। इस ट्रेन में यात्रा करना एक शानदार अनुभव होगा क्योंकि यह आपको सबसे शानदार ट्रेन यात्रा का आनंद देगा।

चित्तौड़गढ़ सड़क मार्ग

आप सड़क मार्ग से भी चित्तौड़गढ़ पहुँच सकते हैं। सड़कों का व्यापक नेटवर्क अन्य शहरों के साथ जगह जोड़ता है। सड़क मार्ग से, यह जयपुर से 325 किलोमीटर, दिल्ली से 583 किलोमीटर, इंदौर से 325 किलोमीटर और अजमेर से 185 किलोमीटर दूर है। ऐसी कई बसें हैं जो इन सड़कों पर चलती हैं। आप इन बसों में सवार होकर चित्तौड़गढ़ पहुँच सकते हैं।

Chittorgarh Fort Built By

Chitrangada Mori

Chittorgarh Fort Occupants

Mauryas of Chittor, Guhilas of Medapata, Sisodias of Mewar

Chittorgarh Fort Area

691.9 acres

Chittorgarh Fort Current Status

 The fort has been declared as UNESCO World Heritage Site

Chittorgarh Fort Timings

 9:45AM – 6:30PM

Chittorgarh Fort Important Structures

Vijay Stambh, Kirti Stambh, Gaumukh Reservoir, Rana Kumbha Palace, Padmini Palace, Meera Mandir, Kalikamata Mandir, Fateh Prakash Palace, Jain Mandir

Seven Gates of the Fort – दुर्ग के सातों द्वार के साथ जुड़ी है गौरव गाथा

Padan Pol, Bhairon Pol, Hanuman Pol, Jorla Pol, Ganesh Pol, Laxman Pol, Ram Pol

Add comment

Must Get It ..