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सबसे ऊँची चोटी : माउंट एवरेस्ट – Mount Everest

Mount-Everest

 माउंट एवरेस्ट – Mount Everest

माउंट एवरेस्ट ऐसी चीज है जिस पर चढ़कर बहुत से आदमी प्रसिद्ध हो चुके है. हो भी क्यों ना ये कोई बच्चो का खेल थोड़े ही है. आज हम आपको दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के बारे में कुछ बताने जा रहे है. तो चलिए दोस्तो शुरू करते है…

माउंट एवेरेस्ट कहाँ है  – Mount Everest Location

Mount Everest माउंट एवरेस्ट या एवरेस्ट पर्वत तिब्बत की सीमा पर नेपाल में स्थित है. यह दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत है. इसके पहले एवरेस्ट पर्वत महालंगुर में स्थित है, यह अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर चीन के क्षेत्र जो कि तिब्बत का एक भाग है में विराजमान है, इसको पहले पीक XV के नाम से जाना जाता था.

1856 में भारत के महान त्रिकोणमितीय सर्वेक्षण में एवरेस्ट की ऊँचाई, जोकि 8840 मीटर यानि की 29 हजार 2 फीट तक थी को पहली बार प्रकाशित किया गया. 1850 में कंचनजंघा को सबसे ज्यादा ऊँचा पर्वत माना जाता था, पर अब यह दुनिया की तीसरी सबसे ऊँची चोटी है.

माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई – Mount Everest Height

इसकी ऊँचाई 8586 मीटर अर्थात 28169 फीट है. इसके आस पास की पर्वत चोटियाँ भी बहुत ऊँची होने की वजह से माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई का पता लगाने में थोड़ी बहुत परेशानी का सामना वैज्ञानिकों को करना पड़ा.

माउंट एवरेस्ट का इतिहास – Mount Everest history

1802 में ब्रिटिशों ने दुनिया की सबसे ऊँची चोटी की खोज शुरू की. पहले नेपाल, ब्रिटिशों को 1830 में घुसने देने के लिए तैयार नहीं था. तराई नामक स्थान से उन्होंने अपना सर्वे शुरू किया, लेकिन भारी बारिश की वजह से मलेरिया फैला हुआ था जिसमे तीन सर्वेक्षण अधिकारीयों की मौत हो गई. हिमालय की सबसे ऊँची चोटी माउन्ट एवरेस्ट से भी ऊँची चोटी है जिसका नाम है चिम्बोरोजी चोटी.

अगर अंतरिक्ष से देखा जाए तो धरती से सबसे ज्यादा ऊँची चिम्बोरोजी चोटी ही दिखाई देगी. चिम्बोरोजी पर्वत चोटी एवरेस्ट चोटी से लगभग 15 फीट ऊँचा दिखती है, लेकिन चुकि समुद्र तल से पर्वतों की ऊंचाई मापी जाती है इसलिए माउन्ट एवरेस्ट को सबसे ऊँची चोटी का दर्जा प्राप्त है. पर्वत पर चढ़ने वाले विश्व के इतिहास में प्रसिद्ध पर्वतारोही अन्द्रेज़ जावदा के अभियान में पहले आठ हजार सिंदर पर कब्ज़ा कर लिया जो पर्वतारोहण के लिए इतिहास बन गई.

माउंट एवरेस्ट से जुड़े मज़ेदार रोचक तथ्य – Mount Everest Facts

1 . समुंद्र तल से दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8848 मीटर हैं और यह नेपाल में स्थित हैं.

2. एवरेस्ट पर्वत का नाम इंग्लैड के वैज्ञानिक जार्ज एवरेस्ट के नाम पर रखा गया हैं. जार्ज ने 13 साल तक भारत की सबसे ऊंची चोटियों का सर्वेक्षण किया था.

3. अभी तक 19 भारतीयों ने एवरेस्ट पर चढ़ने में सफलता हासिल की है.

4. एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचने के लिए 18 अलग-अलग रास्ते मौजूद है.

5. अप्रैल 2015, में आए भूकंप के कारण माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 1” इंच कम हुई है.

6. एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए पहले लोगो को लगभग 15 लाख रूपए फीस देनी होती थी लेकिन 2015 मे नेपाली सरकार ने इसे कम करके लगभग 7 लाख कर दी.

7. एवरेस्ट की चोटी पर हवा की रफ्तार 321 किलोमीटर प्रतिघंटे तक पहुंच सकती है और यहां का तापमान -80° डिग्री फारेनहाइट तक जा सकता हैं.

8. एवरेस्ट पर 120 टन कचरा मौजूद है इसमें ऑक्सीजन टैंक, टेंट आदि सामान शामिल है. 2008 से 2011 तक एवरेस्ट पर चलाए सफाई अभियान में 400 किलोग्राम कचरा हटा दिया गया.

9. पिछले 42 सालों में सिर्फ 2015 को छोड़कर कोई ऐसा साल नही गया जब किसी न किसी ने एवरेस्ट की चढ़ाई पूरी न की हो. 2015 में कोई अभियान इसलिए सफल नही हो पाया क्योकिं अप्रैल में नेपाल में 7.8 की तीव्रता का भूकंप आया था.

10. जॉर्डन रोमेरो दुनिया के सबसे छोटे और यूइचिरो मियूरा दुनिया के सबसे बड़े इंसान है जिन्होनें एवरेस्ट फतह की. इन्होनें ये कारनामा क्रमश: 13 और 80 साल की उम्र में किया.

11. एवरेस्ट पर चढ़ने का सबसे अच्छा समय है मार्च और मई के बीच.. क्योकिं इस समय ना तो बारिश ज्यादा होती है और बर्फ भी ताजा रहती है.

12. आज तक लगभग 5000 लोग एवरेस्ट पर चढ़ने की कोशिश कर चुके है उनमें से करीब 280 लोग चढ़ते समय अपनी जान गवाँ चुके है. उनकी लाशें यही पड़ी हुई है कई बार तो लोग इनका सहारा लेकर ऊपर भी चढ़ते है.

13. एवरेस्ट पर्वत की ऊंचाई हर साल लगभग 1 इंच बढ़ जाती है. ऐसा इरशियन और भारत-आस्ट्रेलियन प्लेट टकराने के कारण होता है.

15. वैसे तो एवरेस्ट की चोटी से नीचे उतरने के लिए 3 दिन का समय लगता है लेकिन 2011 में 2 नेपाली पैरागलाडिंग की सहायता से मात्र 48 मिनट में नीचे उतर आए थे.

16. एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने के लिए 2 महीने का समय लगता है और एक आदमी का खर्च लगभग 80 लाख रूपए आता है. इसमें नेपाल की हवाई यात्रा भी शामिल हैं.

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