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History of Sindhudurg Fort – सिंधुदुर्ग किले का इतिहास

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Sindhudurg Fort Information – सिंधुदुर्ग किले का इतिहास

Fort of Sindhudurg – सिंधुदुर्ग जिले का नाम सिंधुदुर्ग किले (Sindhudurg Fort) के नाम पर ही पड़ा (Sindhudurg Fort Information) जिसका मतलब है समुद्र का किला। सिंधुदुर्ग में लगभग 37 किले हैं, जो महाराष्ट्र में एक ही जगह स्थित सबसे ज़्यादा किलों की संख्या है। इसके साथ-साथ यहाँ हर तरह के किले भी हैं जैसे, जलदुर्ग, भुईकोट और गिरी।

Sindhudurg Fort Information – किला 48 एकड़ में फैला हुआ है। जिसमें 30 फुट ऊंची और 12 फुट मोटी, 3 दीवारें हैं। जो सिर्फ दुश्मनों से ही नहीं अरब सागर की खतरनाक लहरों से भी किले की रक्षा करती हैं। किले को मजबूत बनाने के लिए 4000 लोहे के टीलों का इस्तेमाल किया गया था।

किले में 42 बुर्ज के साथ टेढ़ी-मेढ़ी दीवारें हैं। इस किले को बनाने में 100 आर्किटेक्ट और लगभग 3000 मजदूरों की मेहनत शामिल थी। हर तरीके से सुरक्षित और शानदार ये किला 3 साल में बनकर तैयार हुआ था।

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पर्यटक यहाँ अंडर वॉटर खेलों के भी मज़े ले सकते हैं। सिंधुदुर्ग हर आयामों से बिना कोई शक के एक अनूठा और अद्वितीय किला है। किले की ये सारी विशेषताएं आपके सिंधुदुर्ग किले की यात्रा को यादगार बनाती हैं।

History of Sindhudurg Fort – सिंधुदुर्ग किले का इतिहास

  • यह किला मराठा साम्राज्य के छत्रपति शिवाजी महाराज ने बनाया था। इस किले को बनाने का मुख्य उद्देश्य विदेशी व्यापारियों के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए और जंजीरा के सिद्दी के उदय को रोकने के लिए था।
  • 1664 में हीरोजी इंदुलकर के पर्यवेक्षण के तहत यह निर्माण किया गया था। किला एक छोटे से द्वीप पर बनाया गया था।
  • यह समुद्र किला 48 एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें 3 किमी लंबी दीवार, और दीवारें हैं जो 30 फुट (9.1 मीटर ) उच्च और 12 फुट (3.7 मीटर) मोटी है।
  • कास्टिंग में 4000 पाउंड का सीसा इस्तेमाल किया गया था और नींव की पत्थरों को मजबूती से निर्धारित किया गया था। इस किले को बनाने में तीन साल लगे। मुख्य प्रवेश द्वार इस तरह से छुपा हुआ है कि कोई भी इसे बाहर से देख नहीं सकता।
  • किले में रहने वाले स्थायी निवासियों में से अधिकांश निवासियों को अपर्याप्त रोजगार के अवसरों के कारण स्थानांतरित हो गए, लेकिन आज भी 15 से अधिक परिवार किले में रहते हैं।
  • समुद्र में उच्च प्रवाह की वजह से बरसात के मौसम में पर्यटकों के लिए किला बंद कर दिया जाता है।

Sindhudurg Fort Timings & Entry fee – प्रवेश शुल्क और समय

आप इस किले की यात्रा रोज़ सुबह 10 बजे से शाम के 5:30 बजे तक कर सकते हैं। भारतीय सैलानियों के लिए प्रवेश शुल्क 50 रूपए और विदेशी सैलानियों के लिए प्रवेश शुल्क 200 रूपए है।

How to reach Sindhudurg Fort – सिंधुदुर्ग कैसे पहुंचे 

सिंधुदुर्ग शहर, गोवा के उत्तर में सिंधुदुर्ग जिले में स्थित है, मुंबई (मुंबई) से 450 किमी दक्षिण की दूरी पर है। कोंकण रेलवे सिंधुदुर्ग में एक रेलवे स्टेशन है, लेकिन वहां केवल कुछ ही ट्रेनें ही रुकती हैं। सिंधुदुर्ग जिले में कुडाल, कनकवली और सावंतवाड़ी प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं।

रत्नागिरि, मुंबई, पुणे, सांगली, कोल्हापुर और गोवा राज्य सरकार और वास्को, पणजी, मडगांव, और पेर्नेम से सिंधुदुर्ग तक चलने वाली महाराष्ट्र राज्य सरकार की बसें हैं। सिंधुदुर्ग के 90 किमी दूर स्थित सावंतवाड़ी शहर पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण हैं।

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