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History of Jama Masjid – दिल्ली जामा मस्जिद का इतिहास

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History of Jama Masjid – दिल्ली जामा मस्जिद का इतिहास

Jama Masjid in Hindi – दिल्ली की जामा मस्जिद सिर्फ़ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया मशहूर है (History of Jama Masjid) लेकिन क्या आपको इस ऐतिहासिक मस्जिद का वास्तविक नाम मालूम है ? जामा मस्जिद का असली नाम ‘मस्जिद-ए-जहां नुमा’ है. इसका अर्थ होता है – मस्जिद जो पूरी दुनिया का एक नज़रिया दे.

History of Jama Masjid – जामा मस्जिद का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने 1648 में अपनी प्यारी बेटी जहांआरा बेगम को श्रद्धांजलि देने के लिए किया था। इसे जामी मस्जिद और जुमा मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है। साधारण डिजाइन से बने इस मस्जिद का निर्माण लाल बलुआ पत्थर से किया गया है और इसे सफेद संगमरमर से सजाया गया है। इसमें लाल बलुआ पत्थर से बने तीन विशाल गुंबद हैं, चार टावर और 40 मीटर ऊँची मीनार लाल पत्थर और सफ़ेद मार्बल से बने हैं.

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Jama Masjid in Hindi – जामा मस्जिद

क्या ख़ासियत है इस मस्जिद की – शहर के बीच में आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन के सामने स्थित यह मस्जिद भारत के विशाल मस्जिदों में से एक है। जामा मस्जिद एक ऊंची नींव पर बना है और इसमें प्रवेश के पांच वक्राकार दरवाजे हैं। इसकी छत पर तीन गुम्बद भी है जो दो मीनारों से घिरे हुए है. फर्श पर तक़रीबन 899 काली बॉर्डर बनी हुई है. बादशाही मस्जिद का आर्किटेक्ट प्लान शाहजहाँ के बेटे औरंगजेब ने पाकिस्तान के लाहौर में बनाया था जो बिल्कुल जामा मस्जिद की ही तरह था.

मस्जिद के दीवार में प्रयुक्त टाइल्स को ज्यामितीय आकृति से सजाया गया है। साथी ही इसमें उत्कृष्ट नक्काशी भी की गई है। जमा मस्जिद के बीच का प्रांगण बहुत विशाल है। इसके परिसर में महान सूफी संत शेख सलीम चिश्ती का मकबरा भी है।

इस मस्जिद के मैदान में हज़ारों लोग एक साथ नमाज़ पढ़ सकते हैं. एक साथ हज़ारों लोग जमा होने के कारण ही लोगों ने इसे जामी मस्जिद का नाम दिया था, जो आगे चलकर जुमा मस्जिद हो गया. जुमा मतलब जहां जुमे की नमाज़ होती है. फिर समय के साथ इसका नाम ‘जामा मस्जिद’ हो गया.

History of Jama Masjid – दिल्ली की जामा मस्जिद का इतिहास

मुगल शासक शाहजहाँ ने 1644 और 1656 के बीच जामा मस्जिद का निर्माण करवाया था. इस मस्जिद को तक़रीबन 5000 कामगारों ने बनाया था. असल में इसे मस्जिद-ए-जहाँ-नुमा कहा जाता था. शाह के शासन में वजीर रह चुके सादुल्लाह खान के नेतृत्व में इसका निर्माण किया गया था.

उस समय इसे बनवाने में तक़रीबन 1 मिलियन रुपयों की लागत लगी थी. शाहजहाँ ने आगरा में ताजमहल और नयी दिल्ली में लाल किले का निर्माण भी करवाया था, ये बिल्कुल जामा मस्जिद के विपरीत दिशा में ही है.

जामा मस्जिद का निर्माणकार्य 1656 AD (1066 AH) में पूरा हुआ था. इस मस्जिद का उद्घाटन 23 जुलाई 1656 को उज़बेकिस्तान के बुखारा के मुल्ला इमाम बुखारी ने किया था, ये सब उन्होंने शाहजहाँ के निमंत्रण भेजने पर ही किया था.

एक समय में एक साथ 25000, लोग जामा मस्जिद में प्रार्थना कर सकते है और इसीलिये इसे भारत की सबसे विशाल मस्जिद भी कहा जाता है. इस मस्जिद को साधारणतः “जामा” कहा जाता है जिसका अर्थ शुक्रवार होता है.

History of Jama Masjid – जामा मस्जिद पर हुए कई बार हमले

इतिहासकार बताते हैं कि सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में जीत हासिल करने के बाद अंग्रेज़ों ने जामा मस्जिद पर कब्ज़ा कर अपने सैनिकों का पहरा लगा दिया था. इस दौरान अंग्रेज़ दिल्ली के लोगों को सज़ा देने के मकसद से इस मस्जिद को तोड़ना चाहते थे, लेकिन देशभर में विरोध के बाद अंग्रेज़ों को झुकना पड़ा था.

14 अप्रैल, 2006 को जामा मस्जिद में शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के ठीक बाद लगातार दो बम धमाके हुए. इन धमाकों में 9 लोग घायल हुए थे. हालांकि, इस दौरान मस्जिद की इमारतों को कोई नुकसान नहीं हुआ. 15 सितंबर, 2010 को एक बार फिर से इस ऐतिहासिक मस्जिद को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी. इस दौरान दो बंदूकधारियों ने मस्जिद के गेट नंबर- 3 पर खड़ी एक बस पर फ़ायरिंग की थी. इसमें दो ताइवानी पर्यटक घायल हो गए थे.

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