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Atal Bihari Vajpayee Quotes – अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल वचन

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Quotes by Atal Bihari Vajpayee

Quotes by Atal Bihari Vajpayee – अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल वचन

Atal Bihari Vajpayee Quotes in Hindi – भारत के दसवें प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एक राजनेता ही नहीं इसके साथ वह एक कवि, पत्रकार एवं एक कुशल वक्ता भी थे। आज इस पोस्ट में हम आपको श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के अनमोल विचार (Quotes by Atal Bihari Vajpayee) को बताएंगे जो आपके लिए प्रेरणा के स्रोत होंगे।

Atal Bihari Vajpayee in Hindi – अटल बिहारी वाजपयी अपने राजनैतिक सफ़र में सबसे पसंदीदा और आदर्शवादी नेता थे। इसी के वजह से वह 3 बार प्रधान मंत्री बने। अटल विहारी वाजपेयी एक ऐसा व्यक्तित्व है जिन्होनें भारतीय राजनीति के इतिहास में अपनी अनोखी पहचान बनायीं है।

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आमतौर पर लोग खुद को राजनीति में स्थापित करने में जितनी उम्र गवा देते हैं अटल बिहारी वाजपेयी ने उतने साल राजनीति की है। और सब के दिल में अपने लिए एक जगा बनायीं हैं। जैसे वो राजनेता के रूप में एक अच्छे नेता हैं वैसे ही एक प्रभावशाली वक्ता और कवी हैं। तो आइये जानते हैं अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा कहे गए (Atal Bihari Vajpayee Quotes in Hindi) अनमोल विचारों को –

Atal Bihari Vajpayee Quotes – अटल बिहारी वाजपेयी के सुविचार

  • इस देश को लेकर मेरी एक दृष्टि है ; ऐसा भारत जो भूख, भय, निरक्षरता और अभाव से मुक्त हो।
  • छोटे मन से कोई बड़ा नहीं हो सकता और टूटे हुए मन से कोई खड़ा नही हो सकता।
  • जबतक सामाजिक न्याय नहीं है तब तक स्वतंत्रता अपूर्ण है।
  • अस्पृश्यता (Untouchability) कानून के विरुद्ध ही नहीं, बल्कि परमात्मा तथा मानवता के विरुद्ध भी एक गंभीर अपराध है।
  • मेरे पास न तो दादा की दौलत है और न ही पिता की संपत्ति, मेरे पास सिर्फ मेरी मां का आशीर्वाद है, जो इन सबसे बहुत बड़ा है।
  • मेरी कविता जंग का ऐलान है, पराजय की प्रस्तावना नहीं। मेरी कविता हारे हुए सिपाही का नैराश्य-निनाद नहीं, जूझते योद्धा का जय-संकल्प है। वह निराशा का स्वर नहीं, आत्मविश्वास का जयघोष है।
  • आप दोस्तों को बदल सकते हो लेकिन पड़ोसियों को नहीं।
  • देश में जो भेदभाव की दीवारें खड़ी हैं, उसका ढहाना जरूरी है। मानव और मानव के बीच भेदभाव को मिटाने के लिए एक राष्ट्रीय अभियान की आवश्यकता है।
  • भुखमरी ईश्वर का कोई विधान नहीं है बल्कि यह तो मानवीय व्यवस्थाओं कि विफलता का परिणाम है।
  • मुझे स्वदेश-प्रेम, जीवन-दर्शन, प्रकृति तथा मधुर भाव की कविताएँ बचपन से ही प्रभावित करती रही हैं।
  • हमारे परमाणु हथियार विशुद्ध रूप से विरोधियो के परमाणु हमले को हतोत्साहित करने के लिए काफी है।
  • यदि आपको किसी विशेष पुस्तक में कुछ भी पसंद नहीं है, तो बैठकर चर्चा करें। पुस्तक पर प्रतिबंध लगाना कोई हल नहीं है। हमें इसे वैचारिक रूप से निपटना होगा।
  • लक्ष्य के लिए के गई कड़ी मेहनत कभी भी आप पर थकान नहीं लाती, वो आपके लिए संतोष ही लाती है।
  • जीत और हार जीवन का एक अहम् हिस्सा है, जिसे समानता के साथ देखना चाहियें।
  • हम सभी एक दूसरे से बंधे हुए हैं। इतिहास ने, भूगोल ने, परंपरा ने, संस्कृति ने, धर्म ने, नदियों ने हमें आपस में बांधा है।
  • निरक्षरता और निर्धनता का बड़ा गहरा संबंध है।
  • जलना होगा, गलना होगा और हमें कदम मिलाकर एक साथ चलना होगा।
  • परिवार कल्याण की सफलता महिलाओं को उनके जीवन के साथ पूर्ण स्वतंत्रता देने पर निर्भर करती है।
  • सत्य सबसे शक्तिशाली हथियार है, हर कोई जानता है सरकारी जगहों पर हथियार लेकर नहीं जा सकते।
  • ऊँची से ऊँची शिक्षा क्यों न हो, इसका आधार हमारी मातृभाषा होनी चाहिए।
  • समता के साथ ममता, अधिकार के साथ आत्मीयता, वैभव के साथ सादगी-नवनिर्माण के प्राचीन आधारस्तम्भ हैं। इन्हीं स्तम्भों पर हमें भावी भारत का भवन खड़ा करना है।
  • सेवा-कार्यों की उम्मीद सरकार से नहीं की जा सकती, उसके लिए समाज-सेवी संस्थाओं को ही आगे आना होगा।
  • हमारे पड़ोसी कहते है की एक हाथ से ताली नही बज सकती। हमने कहा चुटकी तो बज ही सकती है।
  • जब मैं बोलना चाहता हूं तो लोग सुनते नहीं, जब लोग चाहते हैं, की मैं बोलूं तो मेरे पास बोलने को कुछ नहीं होता।
  • मैं यहाँ वादे लेकर नहीं, इरादे लेकर आया हूँ।
  • मेरा कहना है कि सबके साथ दोस्ती करें लेकिन राष्ट्र की शक्ति पर विश्वास रखें। राष्ट्र का हित इसी में है कि हम आर्थिक दृष्टि से सबल हों, सैन्य दृष्टि से स्वावलम्बी हों।
  • शिक्षा के द्वारा व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास होता है, व्यक्तित्व के उत्तम विकास के लिए शिक्षा का स्वरूप आदर्शों से युक्त होना चाहिए। हमारी माटी में आदर्शों की कमी नहीं है। शिक्षा द्वारा ही हम नवयुवकों में राष्ट्र प्रेम की भावना जाग्रत कर सकते हैं।
  • मै मरने से नही डरता हूँ, बल्कि बदनामी होने से डरता हूँ।
  • साहित्य और राजनीति के कोई अलग-अलग खाने नहीं होते।
  • हमारा देश एक मन्दिर है और हम इसके पुजारी, हमे राष्ट्रदेव की पूजा में खुद को समर्पित कर देना चाहिए।
  • अगर किसी देश में हलचल नजर आए तो समझिये वहां का राजा ईमानदार है।
  • यदि भारत धर्मनिरपेक्ष नहीं है तो भारत बिल्कुल भारत नहीं है।
  • लोकतंत्र बड़ा नाजुक पौधा है। लोकतंत्र को धीरे- धीरे विकसित करना होगा। केन्द्र को सबको साथ लेकर चलने की भावना से आगे बढ़ना होगा।
  • जीवन एक फूल के समान है, इसे पूरी ताक़त के साथ खिलाओ।
  • कोई हथियार नहीं बल्कि आपसी भाईचारा ही सभी समस्यों का समाधान कर सकता है।

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